सूर्य को ध्यान में रखकर ही बनाए गए हैं वास्तुशास्त्र के सिद्धांत

ऊर्जा का सबसे बड़ा केंद्र सूरज है इसलिए वास्तुशास्त्र में सूरज को बहुत महत्व दिया गया है. काशी के ज्योतिषाचार्य और वास्तु विशेषज्ञ पं. गणेश मिश्र बताते हैं कि वास्तुशास्त्र के सिद्धांत सूर्य को ही ध्यान में रखकर बनाए गए हैं. दस दिशाओं के देवता हैं सूरज जो पूरब दिशा के स्वामी भी है. ज्योतिषियों का कहना है कि सूरज की रोशनी जिस घर में आती है. उस घर के सभी लोग हमेशा स्वस्थ और सुखी रहते हैं. यदि घर का मुख्य द्वार पूर्व की ओर हो तो घर में सुख-शांति, समृद्धि और लक्ष्मी जी आती हैं. और अगर सूरज की रोशनी घर की रसोई में आती है तो यकीन मानिए घर में रहने वाले सभी लोगों की सेहत अच्छी बनी रहती है.

वास्तु विद्वानों का मानना है कि घर लेते समय या बनवाते समय पूर्व दिशा वाला हिस्सा खुला रखना चाहिए. उस हिस्से में आंगन, खिड़कियां, झरोखे और दरवाजे हों तो अच्छी बात है. साथ ही ध्यान रखें कि इस दिशा में पेड़-पौधे न लगाएं. इससे यह होगा कि सुबह-सुबह सूरज की रोशनी बिना किसी अड़चन के घर में प्रवेश कर सकेगी.

कुदरत ने हमें कितना कुछ दिया है. विज्ञान का कुदरत के साथ कोई मुकाबला नहीं. इसका तात्पर्य है कि जितना भी हो सके कृत्रिम रोशनी से बचना चाहिए और कुदरती रूप से इंसान के लिए वरदान मानी जाने वाली सूर्य की रोशनी घर में आने के लिए कोई न कोई स्थान जरूर होना चाहिए. वास्तु विद्वानों का मानना है कि कृत्रिम चीजों से नकारात्मक ऊर्जा आती हैं और कुदरती चीज़ों से सकारात्मक ऊर्जा घर में आती है, जिससे मन खुशहाल व सभी कार्य सूचारू रूप से होते हैं .

सेहत पर असर

आपने देखा होगा कि हमारे बड़े बुर्जुग हमें अधिकतर सूरज की रोशनी में बैठने के लिए कहते हैं. सूरज की रोशनी शरीर पर पड़ने से सभी रोग खत्म हो जाते हैं. सूरज की रोशनी तन-मन को हमेशा स्वस्थ रखती है. और इससे सकारात्मक और आत्मविशवास की बढ़ोतरी होती है. और आपने यह तो कई लोगों से सुना होगा कि जिनके घर में सूर्य की रोशनी नहीं पहुंचती वे लोग अधिक बीमार पड़ते हैं. इसलिए, हो सके तो घर लेते समय या बनवाते समय सूरज की रोशनी घर में जरूर आए, इस बात का ध्यान रखें.