श्रीराम जन्मभूमि शिलान्यास के बाद अब हनुमानजी की जन्मभूमि पर बनेगा विशाल मंदिर

भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर अयोध्या में भव्य मंदिर निर्माण के लिए 5 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों भूमिपूजन होने के बाद अब कर्नाटक के हंपी में हनुमानजी का भव्य मंदिर और विशालतम मूर्ति बनाने की शुरुआत हो रही है। भक्त अब कर्नाटक के किष्किंधा में हनुमानजी की एक विशाल मूर्ति के दर्शन कर पाएंगे, जहां उनका जन्म हुआ था।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक के कोप्पल जिले में हंपी के पास अष्ट चिरंजीवी में से एक भगवान हनुमानजी की जन्मस्थली किष्किंधा में एक निजी ट्रस्ट ने उनकी एक विशाल मूर्ति स्थापित करने की योजना बनाई है। हनुमानजी की यह मूर्ति मंदिर के रूप में उस परिसर का एक हिस्सा होगी, जिसमें रामायण और भगवान हनुमानजी की कथाओं के चित्र वाली दीवारें होंगी।

सबसे अहम बात यह है कि हनुमानजी की विशाल मूर्ति के निर्माण में 1,200 करोड़ रुपए की लागत का अनुमान लगाया गया है। हंपी में हनुमानजी की 215 मीटर ऊंची मूर्ति बनाई जाएगी जो कि अयोध्या में बनने जा रही भगवान श्रीराम की मूर्ति से करीब 6 मीटर छोटी होगी। हनुमानजी की मूर्ति, प्रभु श्रीराम की मूर्ति से छोटी रखने के पीछे भावना यह है कि भगवान से उनके भक्त की मूर्ति बड़ी कैसे हो सकती।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना के कुछ दिनों बाद श्री हनुमद जन्मभूमि ट्रस्ट का गठन किया गया था। प्रस्तावित विशाल मूर्ति को भक्ति के एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। कहते हैं कि भगवान शिवजी के आशीर्वाद से हनुमानजी का जन्म माता अंजनी और केसरी के यहां हुआ था, जिन्होंने दंपत्ति को अपना वरदान देने के लिए वायु देवता को भेजा था, इसलिए भगवान हनुमानजी को पवनपुत्र के रूप में भी जाना जाता है।

श्री हनुमान जन्म भूमि के परिसर में चारों तरफ विशाल गोपुरम होगा। इस परिसर में प्रदक्षिणा पथ, उदानवाण (पार्क), पत्थर की मूर्तियां, कई अन्य वास्तुशिल्प, मूर्तियां और 60वीं मंजिल पर भगवान श्रीराम को समर्पित मंदिर होगा। इस प्रकार भक्त हनुमानजी के मंदिर में सबसे ऊपर भगवान श्रीराम विराजित होंगे।

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यह भी रोचक बात है कि भगवान श्रीराम और हनुमानजी का सदैव साथ रहा है। हनुमानजी हमेशा रामजी के पद चिन्हों पर आगे बढ़े हैं। कुछ ऐसा ही श्रीराम और श्रीहनुमान के मंदिरों के निर्माण को लेकर भी हो रहा है। पहले अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर मंदिर का भूमि पूजन हुआ और इसके तुरंत बाद किष्किंधा में हनुमानजी की जन्मभूमि पर विशाल मंदिर की रूपरेखा तैयार हुई। भगवान श्रीराम और हनुमानजी के भक्त इन दोनों भव्य मंदिरों के निर्माण से बहुत प्रसन्न हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ सालों में ये दोनों ही मंदिर आस्था के बड़े केंद्र बन जाएंगे।