बाजी अवध में बधाई चार बहुयें घर आई

कन्यादान के बाद जनक जी का विनम्रता भरा निवेदन और उसके उत्तर में दशरथ जी का सांत्वना भरा संबोधन। विवाह संबंधों में कन्या ही सबसे बड़ा धन, सबसे बड़ा दहेज है रामायण का यह प्रसंग इस बात को बड़ी दृढ़ता से प्रमाणित करता है।

माता सुनैना द्वारा सीता जी को समझाई गई बातें आज की हर नारी शक्ति को, हर लड़की को अपने हृदय में उतारनी चाहिए। महारानी सुनैना ने माता के रूप में सीता जी को एक आदर्श पुत्री बनाया और विदा होने से पहले एक आदर्श पत्नी और एक आदर्श पुत्रवधू होने की सारी सीख दी।

वहीं ससुराल पक्ष अयोध्या में तीनों माताओं द्वारा चारों बहुओं को अपनी बेटियों के समान मानकर उनका स्वागत करना, उनसे प्रेम व्यवहार करना आदर्श सास बहू के रिश्ते को दर्शाता है।

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रामायण के ये प्रसंग और रामायण के पात्रों का यह व्यवहार हर काल में हर इंसान के लिए उपयोगी है और अनुकरण करने योग्य है।

मधु रजनी में सीता जी द्वारा राम जी का पैर छूने पर रामजी का उन्हें पैर छूने से मना करना और सीता जी को एक मित्र, एक सहयोगी, एक आदर्श सलाहकार के रूप में रहने की सलाह देना, पति पत्नी के पारस्परिक रिश्तो को जीवन भर सुखी और संयमित रखने के लिए सीताराम का चरित्र एक आदर्श है, इसे सबको जानना चाहिए और अपने जीवन में उतारना चाहिए।

जहां एक ओर पत्नी स्वरूपा सीता जी ने स्वयं को रामजी की दासी मानकर उनके चरण छूने चाहे वहीं पति स्वरूप श्री राम जी ने सीता जी को समान स्थान देते हुए आजीवन एक पत्नीव्रती  रहने का वचन दिया।

चारों बहूओं के अयोध्या आने के बाद महाराज दशरथ और महारानी कौशल्या का आपसी संवाद और चारों बहूओं के प्रति एक सास ससुर के रूप में उन दोनों की चिंताएं, एक आदर्श सास ससुर का प्रमाण प्रस्तुत करती हैं।