प्राचीन नगरी वाराणसी में बनने जा रहा है भव्य राधाकृष्ण मंदिर, दो साल तक चलेगा काम

उत्तरप्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी को ‘बनारस’ व ‘काशी’ जैसे नामों से भी जाना जाता है। हिंदू धर्म में वाराणसी का खास स्थान है। वाराणसी दुनिया के प्राचीनतम शहरों में से एक हैं। इसके बारे में अमरीकी लेखक मार्क ट्वेन ने कहा था कि, ‘वाराणसी इतिहास से भी अधिक प्राचीन है। परम्परा की दृष्टि से भी अतिशय प्राचीन है। मिथकों से भी कही अधिक प्राचीन है। और यदि तीनों (इतिहास, परम्परा और मिथक) को एक साथ रखा जाए तो यह उनसे दोगुनी प्राचीन है।‘ भगवान शिव की इस ऐतिहासिक नगरी में अब भव्य राधा-कृष्ण का मंदिर बनने जा रहा है। मंदिर का निर्माण इस्कॉन द्वारा करवाया जा रहा है। वाराणसी में बनने जा रहा मंदिर दिल्ली और कानपुर के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा इस्कॉन मंदिर होगा।

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हाल ही में मंदिर निर्माण को लेकर हुई इस्कॉन प्रबंध समिति की बैठक में तय किया गया है कि वाराणसी में मंदिर निर्माण कार्य अगले वर्ष सात फरवरी से शुरू किया जाएगा और मंदिर का निर्माण कार्य 2023 के मध्य तक पूरा कर लिया जाएगा। इसे बनाने में कुल 19 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मंदिर में देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए रहने, योग करने सहित अन्य सुविधाएं भी होंगी। साथ ही मंदिर से जुड़े हुए आध्यात्मिक छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के लिए एक वैदिक आश्रम भी बनाया जाएगा। इसमें देश विदेश के योग्य शिक्षक बच्चों को वैदिक शिक्षा का ज्ञान देंगे। इसके अलावा मंदिर परिसर में ऑडिटोरियम और सेमिनार हाल का निर्माण भी किया जाएगा। जिसमें कई लोग एक साथ बैठकर चर्चा कर सके।

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इस्कॉन वाराणसी के चेयरमैन अच्युत मोहन दास का कहना है कि, ‘यह मंदिर भारत के पारंपरिक मूल्यों और संस्कृति को आधुनिक माध्यमों से प्रस्तुत करने और समाज के समग्र विकास में मदद करेगा। मंदिर देशी और विदेशी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। मंदिर की भव्यता और उसमें की जाने वाली नक्कासी इसे अन्य मंदिरों से ख़ास बनाएगी। मंदिर में दो तल होंगे। इसके शिखर की ऊंचाई लगभग 125 फीट होगी। मंदिर में एक बार में 250 से ज्यादा श्रद्धालु राधा-कृष्ण के दर्शन कर पाएंगे।