सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर की लड़ाई जीतने वाले के. परासरण को कहा जाता है इंडियन बार का पितामह

हम सबके लिए बहुत गर्व की बात है, आज अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण हो रहा है. माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 5 अगस्त को जैसे ही रामजन्मभूमि पर भूमिपूजन और शिलान्यास किया, बस राम मंदिर के निर्माण कि शुरुआत हो गई. पर ये आसान सफ़र नहीं था. कई सदियों कि लड़ाई थी ये, और इसमें कई लोगों का जीवन भी खप गया.
श्रीराम मंदिर आन्दोलन को वैसे तो कई लोगों ने मिलकर आगे बढ़ाया. पर मुख्य लड़ाई उसके बाद थी, जब ये मामला कोर्ट में पहुंचा था. सुप्रीम कोर्ट में रामलला को भी एक पक्ष बनाया गया था. और उनकी तरफ से पैरवी करने वाले वकील का नाम था के. परासरण.

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आज उनके नाम को देश में सब जानते हैं. क्योंकि इस लड़ाई जितना श्रेय राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े नेताओं को जाता है, उससे कम श्रेय के परासरण का भी नहीं है.उनकी अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट में जो कानूनी लड़ाई लड़ी गई, तमाम वामपंथी इतिहासकारों के झूठे तथ्यों को तर्कों, और सुबूतों की कसौटी पर खारिज करने का काम राम लला पक्ष के वकीलों ने किया, उसकी प्रेरणा और मार्गदर्शक के परासरण ही थे. तो आइये जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ ख़ास और दिलचस्प बातें.

1. के परासरण अदालत में अपनी ख़ास भाषा शैली और तर्कों में पुराने हिंदू ग्रंथों का इतना उल्लेख करते हैं कि एक बार मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजय किशन कौल ने उन्हें ‘इंडियन बार का पितामह’ की उपाधि दे दी थी. और कहा था कि बिना अपने धर्म से विमुख हुए परासरणजी ने कानून को अपना योगदान दिया है.

2. के परासरण को हर जगह और हर सरकार में सम्मान मिला. इंदिरा गांधी की सरकार में वो सॉलिसिटर जनरल भी रहे और बाद में उन्हें अटॉर्नी जनरल भी बना दिया गया था. अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में (1999-2004) उन्हें संविधान की समीक्षा करने वाली ड्राफ्टिंग एंड एडीटोरियल कमेटी में सदस्य बनाया. वाजपेयी जी ने उन्हें 2003 में पद्मभूषण सम्मान से भी सम्मानित किया तो यूपीए-2 में मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें 2011 में पद्मविभूषण सम्मान दिया. और कयास लगाए जा रहे हैं कि, मोदी सरकार के कार्यकाल में उन्हें भारत रत्न भी मिल जाए.

3. 2016 से उन्होंने वकालत से लगभग संन्यास ले लिया था, उन्होंने केस लेना बंद कर दिया था. तब से अब तक उन्होंने केवल 2 ही केस लिए. एक था राम जन्मभूमि का केस और दूसरा सबरीमाला मंदिर का केस. सबरीमाला मंदिर केस में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की बेंच ने उनके सभी तर्कों को खारिज कर दिया, लेकिन राम मंदिर केस में 5 जजों की बेंच में से कोई भी जज उनके खिलाफ नहीं गया और ये मामला जीतकर करोड़ों रामभक्तों का उन्होंने दिल जीत लिया.

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4. इसी वजह से सम्मान के तौर पर राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का उन्हें पहला ट्रस्टी मनोनीत किया गया है. उनके ग्रेटर कैलाश दिल्ली वाले घर में ही

5. 1927 में तमिलानाडु के श्रीरंगम में पैदा हुए के परासरण के पिता केशव आयंगर भी ना केवल वकील थे बल्कि एक बड़े वैदिक विद्वान थे, उन्हीं का असर पड़ा परासरण पर भी. बचपन से ही उन्होंने प्राचीन भारतीय ग्रंथों का काफी अध्ययन किया और अक्सर कोर्ट में अपने तर्कों के के बीच में वैदिक और ग्रंथों में लिखी हुईं बातों का ज़िक्र करते रहे.

6. उनके तीनों बेटे भी वकील ही हैं, उनके तीनों बेटों के नाम हैं- मोहन, सतीश और बालाजी. अब तो परिवार की चौथी पीढ़ी भी उसी राह पर है.