भगवान श्रीराम के साथ लक्ष्मणजी का शेषावतार मंदिर भी बन रहा है अयोध्या में

प्रभु श्रीराम का जीवन उनके अनुज लक्ष्मण के बिना सम्पूर्ण नहीं होता. जहाँ जहाँ भगवान राम हैं, वहीँ उनके साथ लक्ष्मण जी भी विराजमान हैं. तो फिर अयोध्या में भी भगवान् श्रीराम के मंदिर के साथ उनका मंदिर तो बनना तो ज़रूरी है. लक्ष्मणजी को शेषनाग का अवतार या शेषावतार भी कहा जाता है. और इसलिए श्रीराम जन्मभूमि परिसर में शेषावतार मंदिर भी बन रहा है. इसे भी बहुत भव्य बनाया जायेगा. अभी तो ये अपूर्ण है. पर भविष्य में इसे बहुत अच्छे मंदिर के रूप में बनाया जायेगा. परिसर में एक वृहद यज्ञशाला भी होगी, क्योंकि सनातन परंपरा के अनुरूप यज्ञ किये जाने का विधान है. माना जाता है कि कलयुग में यज्ञ एक ऐसा साधन है जिससे मनुष्य अपने पापों के निवारण और प्रभु के समीप होने की कल्पना कर सकता है. मंदिर परिसर में एक विशाल म्यूजियम बनाया जाएगा.

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परिसर विकास परिकल्पना के अनुसार इसमें प्रभु श्रीराम से जुड़े शिलालेख, पत्थर, मंदिर होने के सबूत वाली वस्तुए रखी जाएंगी. इसमे राम मंदिर आंदोलन से जुड़ी यादगार वस्तुओं को भी रखे जाने की संभावना है समतलीकरण और उत्खनन में मिले शिलालेख व पुरावशेष भी रखे जाएंगे. मंदिर निर्माण से जुड़े बड़े अधिकारियों का मानना है कि अभी हर साल लगभग 1 करोड़ तीर्थयात्री और भक्तगण अयोध्या आते हैं. ऐसे में जो भी निर्माण होगा वो अगले 50 साल को ध्यान में रखकर किया जाएगा.

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रामजन्मभूमि परिसर में वेदों की ऋचाएं भी गूंजेंगीं. परिसर में एक वेद पाठशाला का निर्माण होगा. यहां चारों वेदों के बारे में विस्तार से जानकारी मिलेगी. इसके लिए अच्छे से अच्छे आचार्यों की नियुक्ति की जाएगी. हालांकि इसके स्वरूप को लेकर ट्रस्ट की तरफ से अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है.