आज़ादी के बाद अयोध्या के राम मंदिर आन्दोलन की ये हैं प्रमुख घटनाएं

23 दिसंबर, 1949: विवादित स्थल पर हिंदू नियमित रूप से मंदिर के भीतर श्रीराम की पूजा करने लगे।

1984: विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने जन्मभूमि के ताले खोलने और राम जन्मस्थान को स्वतंत्र कराने व एक विशाल मंदिर के निर्माण के लिए अभियान शुरू किया, और इसके लिए एक समिति का गठन किया गया।

1 फरवरी, 1986: फैजाबाद जिला न्यायाधीश ने विवादित स्थल के ताले खोलने का आदेश जारी करके हिदुओं को पूजा की इजाजत दी.

जून 1989: भाजपा ने विश्व हिन्दू परिषद को औपचारिक समर्थन देकर श्रीराम मंदिर निर्माण आंदोलन को और तेज़ कर दिया|ImageSource

1 जुलाई, 1989: भगवान रामलला विराजमान के नाम से कोर्ट में पांचवा मुकदमा दाखिल किया गया।

25 सितंबर, 1990: बीजेपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से लेकर उत्तर प्रदेश के अयोध्या तक रथ यात्रा निकाली|

अक्टूबर 1990: अयोध्या में दो बार निहत्थे कार सेवकों पर पुलिस के अत्याचार से पूरे देश के जनमानस में आक्रोश फैल गया|

अक्टूबर 1991: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार द्वारा जन्मभूमि के आस-पास की 2.77 एकड़ भूमि को अपने अधिकार में लिया गया|

अप्रैल 2002: अयोध्या के विवादित स्थल पर मालिकाना हक को लेकर उच्च न्यायालय के तीन जजों की पीठ ने सुनवाई शुरू की।

मार्च-अगस्त 2003: इलाहबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने अयोध्या में खुदाई की, जिसमें मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले।

जुलाई 2009: लिब्रहान आयोग ने गठन के 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपनी रिपोर्ट सौंपी।

28 सितंबर 2010: सर्वोच्च न्यायालय ने इलाहबाद उच्च न्यायालय को विवादित मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका खारिज करते हुए फैसले का मार्ग प्रशस्त किया।

30 सितंबर 2010: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया, और 2.77 एकड़ जमीन का बंटवारा कर दिया गया था. कोर्ट ने यह जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान के बीच जमीन बराबर बांटने का आदेश दिया था| हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई|

21 मार्च 2017: राम जन्मभूमि के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता की पेशकश की|

9 नवंबर 2019: सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 जजों की विशेष बेंच ने सर्वसम्मति से 40 दिनों की लगातार सुनवाई के बाद ऐतिहासिक फैसला सुनाया, और विवादित जमीन पर पूरी तरह से रामलला का हक बताया, और अपने फैसले में केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाने का भी आदेश दिया, इस ट्रस्ट के पास ही मंदिर निर्माण की जिम्मेदारी है|ImageSource

5 अगस्त 2020: अयोध्या में एक भव्य आयोजन के साथ श्रीराम मंदिर के लिए भूमि पूजन संपन्न हुआ और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के हाथों राममंदिर का शिलान्यास हुआ. अब मंदिर निर्माण का कार्य तेज़ी से शुरू हो जायगा.