फ़िल्मी परदे के एक ऐसे विलेन, जो निजी जीवन में थे बेहद अच्छे इंसान

हिंदी सिनेमा को बिना विलेन के सोचा भी नहीं जा सकता. हर कहानी में नायक और नायिका के अलावा खलनायक ज़रूर होता है. भले ही फिल्म के अंत में उसका अंजाम बुरा होता है, लेकिन पूरी फिल्म में उसकी वजह से सब परेशान रहते हैं. इसलिए जितनी अहमियत फिल्मों में हीरो को दी जाती है, उतना ही प्रभावशाली विलेन होना चाहिए.\

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हिंदी फिल्मों के एक ऐसे ही विलेन थे, अभिनेता प्राण, जो सबसे लोकप्रिय विलेन के रूप में जाने जाते थे. लोगों ने उन्हें फिल्म के हीरो से भी ज्यादा प्यार दिया. आज के ही दिन यानि 12 जुलाई, 2013 को मुंबई के लीलावती अस्पताल में 93 वर्ष की उम्र में इस महान अभिनेता का निधन हुआ था. और आज उनकी 8 वीं पुण्यतिथि है.

12 फरवरी, 1920 को पुरानी दिल्ली के बल्लीमारान में अभिनेता प्राण का जन्म हुआ, और उनका पूरा नाम था प्राण कृष्ण सिकंद, लेकिन बचपन से ही उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था. पहले तो प्राण एक फोटोग्राफर बनना चाहते थे जिसके लिए उन्होंने अपना एक स्टूडियो भी खोला और इसी क्षेत्र में बेहतरीन काम की तलाश में पहले शिमला गए और फिर लाहौर चले गए. ये आज़ादी से पहले की बात है.

उन्हीं दिनों लाहौर में ही एक फिल्म निर्माता-निर्देशक अपनी फिल्म ‘यमला जट’ के लिए एक नई चेहरे की तलाश कर रहे थे और इस खोज में उन्हें प्राण मिल गए. साल 1940 में फिल्म ‘यमला जट’ रिलीज हुई और इसी के साथ ही अभिनेता के तौर पर प्राण का सफर शुरू हो गया. आजादी के बाद प्राण अपने परिवार के साथ लाहौर छोड़कर मुंबई आ गए.

मुंबई आने के बाद उन्हें बॉम्बे टॉकीज की फिल्म जिद्दी में काम मिल गया. फिल्म में उनके साथ देवानंद और कामिनी कौशल थे, यह फिल्म बहुत बड़ी हिट हुई और उनके करियर की गाड़ी चल निकली, फिर दिन ब दिन फिल्मों में उनका कद और रुतबा बढ़ता ही चला गया. अभिनेता प्राण के कई फिल्मों में ज़बरदस्त किरदार निभाये. स्टारडम के मामले में प्राण फिल्म के हीरो से किसी भी तरह कमतर नहीं थे, बल्कि कई फिल्मों मर तो बड़े बड़े सुपरस्टार्स से भी ज्यादा उनकी फीस होती थी.

अभिनेता मनोज कुमार ने फिल्म उपकार से उनकी इमेज को पूरी तरह बदल दिया. इस फिल्म में मलंग काका के रूप में उन्हने इतना पसंद किया गया, कि उनके पास अच्छी भूमिकाओं वाले कई ऑफर्स आने लगे, और अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ उनकी फिल्म ज़जीर ने तो कामयाबी का रिकॉर्ड बना दिया. ज़ंजीर की सफलता में जितना योगदान अमिताभ बच्चन का रहा, उतना ही सराहनीय काम प्राण का भी है.