थोड़ा अलग है इस बार गणेशोत्सव, बदल गया है स्थापना और विसर्जन का तरीका

भारत उत्सवों और त्योहारों का देश है। यहां हर दिन देश के किसी न किसी कोने में उत्सव और त्योहार मनाए जाते हैं। भारत में हमेशा से ही मिल जुलकर त्योहार मनाने की परंपरा रही है। लेकिन इस वर्ष कोरोना संकट ने सब कुछ बदल कर रख दिया है। कोरोना संकट को देखते हुए सरकार ने धार्मिक आयोजनों पर रोक लगा दी है। वहीं लोग भी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जाने से बच रहे हैं। इस कारण इस वर्ष नवरात्री और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी जैसे त्योहारों की रौनक भी फीकी रही। हालांकि कोरोना संकट के कारण लोगों की धार्मिक आस्था कम नहीं हुई है। लोगों ने कोरोना संकट के बीच भी उत्सव मनाने के नए-नए तरीके खोज निकाले हैं।

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कोरोना संकट ने इस बार गणपति स्थापना के साथ-साथ गणपति विसर्जन का तरीका भी बदल दिया है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होकर नदियों और समुद्र के तटों पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए जाते थे. लेकिन इस बार कोरोना संकट को देखते हुए श्रद्धालु अपने-अपने घरों में ही भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा का विसर्जन कर रहे हैं। इसके अलावा कई लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए कृत्रिम कुंड का निर्माण किया है। मुंबई में श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में ऐसे कुंड बनाए हैं। इसके अलावा कुछ श्रद्धालु ऐसे भी हैं जो नदियों व समुद्र में भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का खास ध्यान रखा जा रहा है।

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गौरतलब है कि कोरोना संकट का असर गणपति स्थापना पर भी देखने को मिला है। कोरोना संक्रमण के चलते इस बार बड़ी संख्या में सामूहिक गणेशोत्सव के आयोजन रद्द कर दिए गए। भगवान श्रीगणेश की मूर्तियों का आकार भी पहले से छोटा रखा गया है। साथ ही कोरोना संकट के कारण कई श्रद्धालु इस बार गणपति बप्पा की प्रतिमा खरीदने के लिए बाजार भी नहीं गए। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने इस बार घर पर अपने हाथों से ही मिट्टी की प्रतिमा बनाकर उसकी स्थापना की।