डेढ़ दिन के गणपति का विसर्जन है आज, सरकार द्वारा बनाये गए नियमों का करना होगा पालन

कल यानी 10 सितम्बर से गणेश चतुर्थी के त्यौहार के साथ ही भगवान श्री गणेश की पूजा का महोत्सव पूरे देश में धूमधाम से शुरू हो चुका है. 10 से 11 दिनों के इस उत्सव को सदियों से भारतीय जन मानस बड़े उत्साह से मनाता रहा है. गणेश चतुर्थी के साथ ही भक्त अपनी अपनी श्रद्धा के अनुसार गणेश जी की मूर्ति लेकर आते हैं और उसे अपने घर या सोसाइटी में स्थापित करते हैं. कहीं कहीं किसी मोहल्ले या उपनगर के सार्वजनिक गणपति होते हैं, जिसमें सब लोग मिलकर हिस्सा लेते हैं. प्रतिदिन गणेश भगवान की मनपसंद चीज़ों का उन्हें भोग लगाया जाता है. महाराष्ट्र में ये त्यौहार सबसे ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है, खासकर मुंबई और पुणे में तो इसके लिए बड़ी तैयारियां की जातीं है. और जितना महत्त्व गणेश चतुर्थी पर भगवान श्री गणेश की स्थापना को दिया जाता है, उतना ही महत्व श्रीगणेश के विसर्जन को दिया जाता है. गणेश चतुर्थी के दिन से डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन और 11 वे दिन विसर्जन किया जाता है. सबसे बड़ा विसर्जन चतुर्दशी के दिन यानि 11 वे दिन किया जाता है.

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लेकिन पिछले लगभग 2 वर्ष से हालात थोड़े अलग हैं. पूरी दुनिया में कोरोना महामारी की वजह से नियम कर्म भी बदल गए हैं. इसलिए सरकार ने भी इसके मद्देनज़र सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा है. हालांकि इस वर्ष अनुमति लेने वाले गणेश मंडलों की संख्या पिछली बार से अधिक है, महाराष्ट्र, मुंबई में प्रतिमा के विसर्जन के लिए केवल 10 स्वयंसेवकों को साथ जाने की अनुमति होगी. उर विसर्जन के लिए सरकार द्वारा बनाये गए सभी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा. हाँ भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित ज़रूर किया है, पर विसर्जन के सभी दिनों में बहुत शान्ति के साथ भगवान श्री गणेश को विदाई दी जायेगी. सभी भक्त यही कामना कर रहे हैं कि, भगवान श्रीगणेश आने वाले दिनों में सब कुछ ठीक कर दें. ताकि पहले की ही तरह सभी त्योहारों को धूम धाम से मनाया जा सके. इसी उम्मीद के साथ आज डेढ़ दिन के गणपति बप्पा का विसर्जन किया जा रहा है.