दिशाशूल में यात्रा करना बन सकता है दुर्घटना की वजह, जाने से पहले ज़रूर कर लें ये उपाय

सनातन धर्म बहुत महान है. इसकी अपनी बहुत सारीं मान्यताएं भी हैं. कुछ बातों को शास्त्रों में भी वर्जित माना जाता है. ऐसी ही एक विशेष मान्यता है दिशाशूल की. दिशाशूल का अर्थ होता है एक दिशा का होना जिसमें जाने के बाद आपको भारी भरकम नुकसान झेलना पड़ सकता है. दिशाशूल एक ऐसा मुहूर्त होता है जिसमें व्यक्ति को बड़े ही सावधानी व सतर्कता के साथ कहीं बाहर यात्रा पर जाने के लिए कदम निकालना चाहिए.

जिस तरह से त्यौहार मनाने के, पूजा करने के लिए कुछ नियम होते हैं. वैसे ही हर दिन यात्रा के भी कुछ नियम होते हैं. दिशाशूल के भी कुछ नियम हैं जिन्हें समझने के बाद ही किसी भी दिशा में यात्रा करनी चाहिए. यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो मान्यता है कि, गलत मुहूर्त और दिशा में जाने पर व्यक्ति के साथ कुछ बुरा भी हो सकता है, या दुर्घटना का योग बन जाता है.

कहते हैं हमारे पूर्वज हर काम और यात्रा, दिन, मुहूर्त और समय देखकर ही शुरू करते थे. पर आज के समय में भाग दौड़ भरी जिंदगी है. लोगों के पास भी ज्यादा फुर्सत नहीं है. तो ये सब देखना और तय करना मुश्किल होता है. पर फिर भी कुछ ऐसे मुहूर्त होते हैं, जिन्हें देखकर काम किये जाएँ तो हमारे साथ सब अच्छा ही होता है. और अगर ऐसा नहीं कर पाते तो कुछ छोटे छोटे उपाय करके भी अशुभ घड़ी को टाला जा सकता है.

आइए जानते हैं विस्तार से इसकी कुछ अहम दिशाओं के बारे में:

मान्यता है कि, मंगलवार और बुधवार को उत्तर दिशा की तरफ यात्रा शुभ नहीं होती. तो इसी तरह गुरुवार को दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करने से कार्य की सफलता में संदेह होता है. इसके अलावा दिशा शूल के समय यात्रा करने से यात्रा सफल नहीं होती, और यात्रा मार्ग में भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है.

इसके अलावा यदि रविवार को पश्चिम दिशा में जाना ही है तो दलिया व घी खाकर निकलना चाहिए. इससे दिशाशूल का प्रभाव कम हो जाता है. और सोमवार के दिन निकल रहे हैं तो निकलते समय घर का शीशा जरूर देखें व मंगलवार को निकलते समय गुड़ खाकर निकलना चाहिए.
इसके अलावा बुधवार को धनिया, गुरुवार को दही, शुक्रवार को जौ, शनिवार को अदरक या उड़द खाकर प्रस्थान करना चाहिए.