राम दरबार है जग सारा

अयोध्या में भगवान श्री राम का राज्याभिषेक होने के साथ ही तीनों लोकों में धर्म की स्थापना हो गई, सब हर्षित हो गए, सबके शोक समाप्त हो गए। शिव जी, ब्रह्मा जी, इंद्र आदि देवता, चारों वेद, यक्ष, गंधर्व, अयोध्या वासी, चराचर के समस्त प्राणी राम की जय जयकार कर रहे हैं और अपने अपने अनुसार राम की स्तुति गा रहे हैं, ऐसा लग रहा है कि सारा संसार ही राम का दरबार हो गया है।

राज्याभिषेक के बाद श्री रामचंद्र को संबोधित करते हुए सूर्यवंश के कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ कहते हैं— ‘ राजा बनना उतना ही कठिन कार्य है जितना सेवक धर्म निभाना क्योंकि राजा वास्तव में प्रजा का सेवक ही होता है।’

राम जी गुरुदेव के वचनों को आभार सहित आशीर्वाद स्वरूप ग्रहण करते हैं और कहते हैं— गुरुदेव पूज्य पिताश्री ने भी मुझे यही कहा था कि राजा होने का अर्थ है सन्यासी हो जाना। फिर उसका अपना कुछ नहीं रहता सब कुछ देश का हो जाता है। आवश्यकता पड़ने पर देश के लिए पत्नी पुत्र भाई मित्र यहां तक कि प्राण भी त्यागने पड़ें तो त्याग दे। क्योंकि देश ही उसका परिवार है। जो राजा प्रजा के लिए त्याग नहीं कर सकता उसको प्रजा से कर लेने का कोई अधिकार नहीं।

राजनीति में इन विचारों की नितांत आवश्यकता है। आज इन्हीं विचारों के अभाव में भारत ही नहीं दुनिया के बहुत सारे देश बर्बाद हो रहे हैं।
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राम का जीवन मनुष्य मात्र के लिए ही नहीं देवताओं के लिए भी एक आदर्श स्थापित करता है। राम के आदर्शों विचारों और नीतियों से प्रेरित प्रभावित होकर सारे समाज का कल्याण किया जा सकता है। लोक कल्याण की इसी भावना से प्रेरित होकर ब्रह्मा जी की आज्ञा से नारद जी महर्षि वाल्मीकि को रामचरित्र लिखने के लिए प्रेरित करते हैं।