अंग्रेज भी नहीं चाहते थे, इस समस्या का समाधान – योगी आदित्यनाथ

1885 में ही इस मामले को सुलझाया जा सकता था, लेकिन घालमेल किया गया, अंग्रेज भी इस समस्या का हल नहीं होने देना चाहते थे, इसलिए ये संघर्ष लगातार चलता ही रहा. और 1934 में कीर्तन शुरू हो गए, श्रीराम के एतास्वीर वहां लगा दी गई, 1949 में रामलला प्रकट हुए, और फिर 1986 में ताला खोला गया. श्रीराम के मंदिर बहुत सारे हैं और हर जगह हैं, लेकिन ये मुद्दा मंदिर का नहीं, राम जन्मभूमि का था, और वहां रामलला ही विराजमान होंगे’.

ये बातें उतरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू के दौरान कहीं हैं.

आगे बात करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘मेरे लिए ये दिन बहुत महत्वपूर्ण है. लम्बे समय से चले आ रहे एक विवाद का अंत लोकतांत्रिक तरीके से हुआ है. ये हमारे आराध्य प्रभु श्रीराम के उस मंदिर का शिलान्यास है, जिसके लिए कई पीढियां वर्षों से संघर्ष कर रहीं थी. और भारत के लोगों ने पूरी दुनियां को आइना दिखाया है. संवैधानिक तरीके से इसका हल हुआ है.’ उन्होंने ये भी कहा कि, राम तो हर जगह है, उन्हें ढूँढने की आवश्यकता नहीं है. पर उन्हें अपना स्थान मिलना चाहिए, वो जन्मभूमि हमारी थी, और हमारी ही रहेगी, कई पीढियां इससे जुड़ी हुईं थी, हम इसके लिए आन्दोलन में शामिल थे, और हमें पूरी उम्मीद थी.

साथ ही उन्होने ये भी कहा कि, ‘आम जनता के लिए ये बहुत गौरव की बात है, जब कोर्ट में मामला था तो प्रधानमंत्री कभी अयोध्या नहीं गए, और उन्होने पार्टी के सभी नेताओं से सख्त लहजे में कहा था कि, कोई भी बेवजह बयानबाजी ना करे, कोर्ट का फैसला आने दीजिये. और आज एक बहुत बड़ा दिन है, जो हम सब राम मंदिर शिलान्यास के साक्षी बने हैं.